पैसो के लिए रोना और काम समय पर कभी नहीं होना

0

भोपाल (मध्य स्वर्णिम): भोपाल में मेट्रो निर्माण के कारण सड़कों पर भारी ट्रैफिक जाम, चौड़ीकरण की समस्या, और इंजीनियरिंग खामियों (जैसे कम ऊंचाई वाले स्टेशन) से जनता परेशान है, जिससे वैकल्पिक मार्गों पर दबाव बढ़ा है और धूल, गड्डों व कीचड़ से भी दिक्कतें हो रही हैं, खासकर पुराने शहर और व्यस्त है ट्रैफिक जाम और संकरी सड़कें एम् पी नगर जैसे स्टेशनों पर मेट्रो पिलर की ऊंचाई मानक (5.5 मीटर) से कम (लगभग 4.8 मीटर) पाई गई, जिससे भारी वाहन टकरा रहे थे इस गलती को सुधारने के लिए सड़कों को खोदना पड़ रहा है, जिससे और ज्यादा दिक्कतें बढ़ गई हैं और यह काम बार-बार करना पड़ रहा है। मतलब साफ है बिना अनुभव के इंजीनर या कॉन्ट्रेक्टर इस काम को करवा रहे है। अनुभाव् न होने के कारण कई हिस्सों में सड़कें खराब हो गई हैं, गड्ढे और मिट्टी की भराई से कीचड़ और फिसलन बनी मेट्रो शुरू होने के बावजूद, अंतिम छोर (लास्ट- माइल कनेक्टिविटी) और फीडर बसों की व्यवस्था ठीक न होने से लोग अभी भी निजी वाहनों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे यातायात पर पूरा असर नहीं दिख रहा है। जिससे हादसे का डर रहता है। धूल और प्रदूषण भी यात्रियों के लिए एक बड़ी समस्या है। पुराने शहर के सबसे व्यवस्त मार्गों में से एक बैरसिया पर करोंद चौराहा से सिंधी कालोनी तक मेट्रो की आरेंज लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है। मेट्रो का काम करने के लिए कंपनी ने सड़क के बीचों-बीच बेरिकेड्स लगाए हैं, जिनकी वजह से सड़कों की चौड़ाई मुश्किल से 10 फिट की रह गई है। वहीं पसरा अतिक्रमण लोगों के लिए सिरदर्द बना हुआ है। वजह से हर दिन इस मार्ग पर घंटों तक लंबा जाम लग रहा है कलेक्टर के निर्देश पर भी जिम्मेदार अधिकारी कोई व्यवस्था नहीं बना पाए हैं। नतीजतन इस मार्ग से हर दिन गुजरने वाले एक लाख से अधिक वाहन चालकों को जाम की समस्या से रूबरू होना पड़ रहा है। सड़क खोदाई कर मरम्मत तक नहीं की मेट्रो रेल लाइन के कार्य के दौरान करोंद से लेकर सिंधी कालोनी तक सड़क की खोदाई की गई थी लेकिन इसकी दोबारा से मरम्मत नहीं की गई है। वर्षा के दौरान उखड़ी सड़क पर जलभराव की स्थिति बनती है, गड्डों से वाहनों को गुजरने में समय लगता है। ऐसे में यह लापरवाही भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती है। बीच रास्ते में खड़े रहते हैं ई रिक्शा करोंद चौराहा, डीआइजी बंगला, काजी कैंप और सिंधी कालोनी क्षेत्र में मुख्य सड़क पर जगह कम बची है। इसके बाद भी यहां पर ई रिक्शा, ऑटो और आपे चालक अपना कब्जा जमाए रहते हैं। करोंद चौराहा के चारों तरफ इनका अतिक्रमण है, जिससे दो व चार पहिया वाहनों को निकलने के लिए जगह ही नहीं बचती है। फुटपाथ पर दुकान व ठेले वालों का कब्जा सड़क पर जाम की स्थिति निर्मित न हो इसके लिए अतिरिक्त पट्टी बनाई जानी थी लेकिन कुछ ही जगह बनाई गई थी। यह भी सफल नहीं हुई, क्योंकि करोंद चौराहा से लेकर सिंधी कालोनी तक फुटपाथ पर अवैध दुकानदारों व ठेले वालों ने अपना कब्जा जमा रखा है। मेट्रो काम में टेंडर में दो तीन बार बदलाव किया गया आर्थिक व्यवस्था गड़वड़ाई प्रशासनिक और वित्तीय दबाव प्रशासनिक फेरबदल और परियोजना की बढ़ती लागत (जो करीब 3 करोड़ प्रतिदिन के नुकसान के रूप में देखी गई) भी एक कारण है।

भोपाल मेट्रो स्टेशन का काम धीमी गति से क्यों चल रहा है?

इस धीमी प्रगति में कई कारकों का योगदान रहा है। प्रशासन आशावादी बना हुआ है, फिर भी निम्नलिखित मुद्दे स्पष्ट हैं

रसद संबंधी चुनौतियाँः

एक व्यस्त शहर के बीचोंबीच भारी मशीनरी और सामग्री को स्थानांतरित करने से काम के घंटे सीमित हो गए हैं।

संविदात्मक अड़चनेंः

भुगतान को मंजूरी देने या स्टेशन के आंतरिक सज्जा के लिए तकनीकी डिजाइनों को अंतिम रूप देने में देरी के कारण प्रगति रुक गई है।

श्रम की कमीः
मेट्रो-ग्रेड फिनिशिंग कार्य के लिए विशेषीकृत श्रमिकों की निरंतर आपूर्ति एक लगातार बाधा रही है।

कई शहरों में मेट्रो निर्माण से अस्थायी तेजी आती है। भोपाल में, लंबे समय से अधूरा पड़ा यह प्रोजेक्ट निवासियों में निर्माण संबंधी थकान पैदा कर रहा है। इन 10 पूर्ण स्टेशनों के नीचे स्थित छोटे व्यवसायी धूल, अवरोधों और सीमित आवागमन के कारण ग्राहकों को खो रहे हैं। मेट्रो का उद्देश्य शहर की गति को बढाना है, लेकिन इसकी वर्तमान स्थिति ने परियोजना क्षेत्रों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावी रूप से धीमा कर दिया है।