भोपाल समेत प्रदेश के 8 शहरों में सांसों पर गंभीर संकट

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इंदौर (मध्य स्वर्णिम): भागीरथपुरा में बिछाई गई नर्मदा लाइन टेस्टिंग के दौरान ही फूट गई। इस लाइन को तीन दिन पहले डाला गया था। जिस हिस्से में पाइप लीकेज हुआ है, वहां फिर खुदाई कर लाइन दुरुस्त की गई है। अब गुरुवार को फिर टंकी से पानी छोड़कर लाइन की जांच की जाएगी। वैसे तो यह लाइन कई दिनों से मंजूर थी, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ पाई थी और बस्ती में दूषित पेयजल के कारण 18 लोगों की मौत हो गई और डेढ़ हजार से ज्यादा लोग बीमार हो चुके हैं। मौतों का मुद्दा गरमाने के बाद अफसरों ने ताबड़तोड़ लाइन डाली, हालांकि आठ दिन पहले उद्यान में बने शौचालय को तोड़कर यह दावा किया गया था कि लाइन में ड्रेनेज का पानी वहीं से मिक्स हो रहा था, लेकिन जब बाद में भी गंदे पानी की समस्या बरकरार रही तो फिर अफसरों ने नई लाइन बिछाने का ही फैसला ले लिया था। बस्ती में जाने वाले मार्ग पर रविवार को खुदाई कर पुरानी लाइन निकाली गई थी और सोमवार को वहां नए पाइप बिछाए गए। उन्हें जोड़ा गया और मंगलवार को गिट्टी डालकर लाइन के ऊपर रोलर चलाकर सड़क को समतल कर दिया था। इस वितरण लाइन को भागीरथपुरा टंकी से जोड़ा गया। दोपहर में बस्ती में अफसर पहुंचे और टंकी से सप्लाई शुरू हुई। कुछ देर बाद गली में पानी का फव्वारा नजर आने लगा। दरअसल जल्दबाजी में डाले गए पाइप ठीक से सेट नहीं हुए थे और एक हिस्से में लाइन फूट गई।

उच्चस्तरीय संयुक्त समिति गठित:
एनजीटी ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जहां दिल्ली-एनसीआर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान और एयर-शेड आधारित नीति लागू है, वहीं मध्यप्रदेश में अब तक कोई प्रभावी राज्यस्तरीय तंत्र तैयार नहीं किया गया है। इसी वजह से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर एक उच्चस्तरीय संयुक्त समिति गठित की है। इसमें पर्यावरण, नगरीय विकास, परिवहन, प्रदूषण नियंत्रण और केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ पूर्व वरिष्ठ अधिकारी डॉ. रवि प्रकाश मिश्रा को भी शामिल किया गया है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है। समिति को छह सप्ताह के भीतर स्थिति का आकलन कर कार्रवाई रिपोर्ट के साथ विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।