जबलपुर/इंदौर (मध्य स्वर्णिम): भागीथपुरा में दूषित पानी की सप्लाई से अब तक 15 मौतें की बात सामने आई हैं लेकिन सरकार ने जो स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की है। उसमें दूषित पानी से चार मौतें होना बताया है, जबकि महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने 10 लोगों की मौत हो जाने की जानकारी मिलने की बात कही है। इंदौर में दूषित पानी से 4 व्यक्तियों की मौत हुई है! 294 व्यक्तियों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था, जिसमें से 32 को आईसीयू में रखा गया था। वहीं 93 लोग स्वस्थ्य होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। मृतकों के परिजन को दो दो लाख रुपए अनुग्रह सहायता दी गई है। प्रदेश सरकार की तरफ से हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच में यह जानकारी प्रस्तुत की गई है। इंदौर बेंच में भागीरथपुरा मामले में याचिका दाखिल की गई थी। दरअसल, हाईकोर्ट में दूषित पेयजल मामले में दो याचिकाएं लगी हैं। भागीरथपुरा में हुई मौतों में एक महिला का पोस्मार्टम किया गया, बाकी सभी को स्वास्थ्य विभाग प्रारंभिक तौर पर सामान्य मौतें बताता रहा है। बाद में चार मौतों की वजह डायरिया बताई गई है। दूषित पानी के मामले में एमपी हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस मामले में निगमायुक्त और अपर आयुक्त को शोकाज नोटिस जारी किया है। उन्हें इस घटना के तथ्य पेश करने को कहा गया है। जबलपुर में हाईकोर्ट जस्टिस डी डी बसंल तथा जस्टिस राजेन्द्र कुमार वाणी की अवकाशकालीन युगलपीठ के समक्ष सरकार की तरफ से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि दूषित पानी के कारण इंदौर में चार व्यक्तियों की मौत हुई है। अभी तक कुल 294 व्यक्तियों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है, जिसमें से 32 व्यक्तियों आईसीयू में भर्ती है और 93 व्यक्तियों को डिस्चार्ज कर दिया गया है। वर्तमान में 201 व्यक्ति उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती हैं। अवकाशकालीन विशेष बेंच ने स्टेटस रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेते हुए अगली सुनवाई 6 जनवरी को निर्धारित की है। इंदौर निवासी रितेश ईनानी तथा महेश गर्ग भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण नागरिकों की मौत तथा उनके बीमार होने के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई थी। इसके अलावा अन्य व्यक्तियों ने भी इंटर विनर बनने आवेदन पेश किया था। हाईकोर्ट इंदौर बेंच ने याचिकाओं की सुनवाई करते हुए सरकार को शुद्ध पेयजल आपूर्ति, मृतक व प्रभावित व्यक्तियों की संख्या तथा उनके उपचार तथा दोषियों के खिलाफ कार्यवाही सहित अन्य बिंदुओं के समक्ष में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए थे। हाईकोर्ट की मुख्यपीठ में जस्टिस डी डी बसंल तथा जस्टिस राजेन्द्र कुमार वाणी की विषेष अवकाशकालीन पीठ ने याचिकाओं की सुनवाई की। सरकार की तरफ से पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट में उक्त जानकारी पेश की गई। इसके अलावा यह भी बताया गया है कि भागीरथपुरा पुलिस स्टेशन के समीप स्थित संभावित संदूषण बिन्दु की पहचान कर ली गई है। जिस संरचना के कारण पानी संदूषित हो रहा था उसे हटा दिया गया है। जोनल अधिकारी तथा सहायक अभियंता को निलंबित कर दिया गया है और उप अभियंता को सेवामुक्त कर दिया गया है।
रिपोर्ट आने में भी हुआ इंतजार:
भागीरथपुरा मामले में सरकारी रिपोर्ट भी खूब इंतजार करवा रही है। मौतों का सिलसिला 28 दिसंबर से शुरू हो चुका था, लेकिन पहली रिपोर्ट दो जनवरी को आई जिसमें पेयजल दूषित बताया गया। जिन 15 मौतों की बात की जा रही है उनमें इनमें 9 महिलाएं, छह पुरुष और एक नवजात शामिल है। मौतों की वजह का खुलासा रिपोर्ट में शामिल नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने डायरिया की वजह से चार मौतें रिकार्ड की है। इंदौर में जब मुख्यमंत्री आए थे तो उन्हें भी अफसरों ने चार मौतें ही बताई, जबकि बस्ती में लगातार लोगों की मौत हो रही है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट:
दूषित पानी की आपूर्ति से कई लोगों की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने इस गंभीर मामले को मानवाधिकार उल्लंघन से जोड़ते हुए मध्यप्रदेश सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपने बयान में कहा है कि रिपोर्ट के अनुसार भगीरथपुरा इलाके के निवासी कई दिनों से दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायत कर रहे थे, लेकिन इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आयोग ने इस मामले में मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
एक्शन में मुख्यमंत्री,अधिकारियों पर गिरी गाज:
इंदौर के भागीरथपुरा में हुए घटना के मुख्यमंत्री लगातार एक्शन में दिखाई दे रहें हैं ।अपर आयुक्त को हटाने के निगम आयुक्त को भी चलता कर दिया है।सोशल मीडिया पोस्ट में सीएम डॉ. यादव ने लिखा – दूषित पेयजल के कारण हुई घटना में राज्य सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इस संबंध में कठोर निर्णय लिये जा रहे हैं। निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया, पीएचई के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है। इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को भी हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुए हादसे के बाद इंदौर नगर निगम के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया गया है। राज्य सरकार ने नगर निगम में एक बार फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को अहम जिम्मेदारी सौंपते हुए तीन आईएएस अधिकारियों को अपर आयुक्त पद पर नियुक्त किया है। सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से जारी आदेश में 2017 बैंच के आईएएस इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया को हटा कर मध्य प्रदेश शासन किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग का उप सचिव बनाया गया है। वहीं, दो डायरेक्टर आईएएस और एक प्रमोटी आईएएस को नगर निगम इंदौर में पदस्थ किया है। इसमें 2019 बैच के आईएएस और खरगोन में सीईओ आकाश सिंह को इंदौर नगर निगम में अपर आयुक्त बनाया गया है। साथ ही 2020 के आईएएस और आलीराजपुर में सीईओ प्रखर सिंह और 2020 बैंच के ही आईएएस और इंदौर में उप परिवहन आयुक्त आशीष कुमार पाठक को इंदौर नगर निगम में अपर आयुक्त् बनाया गया है। नगर निगम में एक साथ तीन अधिकारियों की नियुक्ति को सरकार की ओर से प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही बढ़ाने का संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि नई टीम के माध्यम से निगम के कामकाज, सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र को और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
पाप का प्रायश्चित करना होगा : उमा
मध्य प्रदेश के इंदौर पर दूषित पानी की वजह से 15 लोगों की मौत हो गई। इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता उमा भारती ने राज्य सरकार को घेरा है।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीडि़तों से माफी मांगनी होगी और जो दोषी हैं उनको सजा देनी होगी।भाजपा नेता ने कहा, साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारे प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं। प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी जो कितनी जिंदगियों को निगल गया और निगलता जा रहा है, मौत का आंकड़ा बढ़ रहा है। उन्होंने आगे कहा, जिंदगी की कीमत दो लाख रुपए नहीं होती क्योंकि उनके परिजन जीवन भर दु:ख में डूबे रहते हैं। इस पाप का घोर प्रायश्चित करना होगा, पीडि़तजनों से माफी मांगनी होगी और नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी अपराधी हैं उन्हें अधिकतम दंड देना होगा। यह मोहन यादव जी की परीक्षा की घड़ी है।
इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा : राहुल
कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद राहुल गांधी ने इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पानी के दूषित होने को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार की जमकर आलोचना की। लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने कहा कि इंदौर में जहर बांटा जा रहा है और प्रशासन कुंभकर्ण की तरह सो रहा है।राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, इंदौर में पानी नहीं, जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में रहा। घर-घर मातम है, गरीब बेबस हैं और ऊपर से बीजेपी नेताओं के अहंकारी बयान। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है, उन्हें सांत्वना चाहिए थी; सरकार ने घमंड परोस दिया। कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, लोगों ने बार-बार गंदे, बदबूदार पानी की शिकायत की, फिर भी सुनवाई क्यों नहीं हुई? सीवर पीने के पानी में कैसे मिला? समय रहते सप्लाई बंद क्यों नहीं हुई? जिम्मेदार अफसरों और नेताओं पर कार्रवाई कब होगी? ये ‘फोकट’ सवाल नहीं ये जवाबदेही की मांग है। साफ पानी एहसान नहीं, जीवन का अधिकार है और इस अधिकार की हत्या के लिए बीजेपी का डबल इंजन, उसका लापरवाह प्रशासन और संवेदनहीन नेतृत्व पूरी तरह जिम्मेदार है।




