भोपाल/उज्जैन (मध्य स्वर्णिम): सिंहस्थ लैंड पुलिंग टीडीएस 8, 9, 10, 11 को लेकर किसानों का विरोध था। इसे लेकर आंदोलन किया जा रहा है। पिछले एक साल से अधिक समय से यह आंदोलन जारी है। इसी को लेकर पिछले माह किसान संघ के प्रतिनिधियों के साथ सरकार ने वार्ता रखी थी। वार्ता के उपरांत दोनों पक्षों ने लैंड पुलिंग निरस्त के समझौते की घोषणा की थी। किसान संघ ने दुसरे दिन धन्यवाद यात्रा निकाली और सरकार की और से जारी वक्तव्य में मुख्यमंत्री ने किसानों के सम्मान में योजना निरस्त की घोषणा की थी। इसके दो दिन बाद 19 नवंबर को निरस्त आदेश की बजाय सरकार की और से संशोधन जारी किया गया। इसे लेकर किसान संघ गुस्सा गया और सीधे तौर पर निरस्त आदेश जारी करने की मांग दो दिन में की। सरकार से नाराज किसान संघ ने प्रांत के 18 जिलों के प्रतिनिधियों की बैठक के बाद एक ही नारा 26 बारह दिया है। यानि कि 26 दिसंबर से उज्जैन के विक्रमादित्य प्रशासनिक भवन पर घेरा डालो डेरा डालो। प्रदेश अध्यक्ष कमल सिंह आंजना का कहना है कि अब जब तक निरस्त का आदेश पत्र हाथ में नहीं तब तक कोई चर्चा नहीं।
12 हजार बीघा जमीन पर लैंड पुलिंग कानून:
सिंहस्थ क्षेत्र के 17 गांवों की 2378 हेक्टेयर यानिकी लगभग 12 हजार बीघा जमीन पर लैंड पुलिंग कानून के तहत नगर विकास योजना 8,9,10,11 के तहत अधिग्रहण किया जाने के लिए विकास प्राधिकरण ने सूचना जारी की थी। करीब 1896 किसानों की जमीन इसके तहत अधिग्रहण की जाने की प्रक्रिया की गई। इसके तहत आपत्ति की सुनवाई में भी किसानों को दरकिनार किया गया। किसानों का आरोप है कि अपील स्वीकार नहीं की जाते हुए अनेकानेक बहाने बनाए गए।
आंदोलन में किसान दुधारू पशु भी लाएंगे:
प्रदेशाध्यक्ष कमलसिंह आंजना के अनुसार इस बार घेरा डालो डेरा डालो में किसान परिवार सहित तो आएंगे ही साथ में ऐसे मवेशी गाय,भैंस भी लाएंगे जो आदतन किसान एवं उसकी पत्नी के हाथ से ही दूध दोहने पर दूध देते हैं। ये मवेशी भी वहीं रखे जाएंगे जहां घेरा डालो डेरा डालो होगा। अब मवेशी आएंगे तो चारा और गौबर जैसी स्थिति भी बनेगी ही। उनके अनुसार प्रांत के 18 जिलों के 115 तहसील से किसान प्रतिनिधि एवं किसान इस आंदोलन में आएंगे।सिंहस्थ लैंड पुलिंग योजना अंतर्गत सिंहस्थ क्षेत्र के 17 गांवों के ग्रामीणों ने पीपलीनाका पर बैठक आयोजित की थी।
सरकार ने उज्जैन लैंड पूलिंग नीति पूरी तरह निरस्त किया:
मध्य प्रदेश शासन ने उज्जैन विकास प्राधिकरण की सिंहस्थ लैंड पूलिंग योजना अंतर्गत प्रस्तावित नगर विकास स्कीम क्रमांक 8, 9, 10 और 11 को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार पूर्व में किए गए संशोधन को भी रद्द करते हुए अब इन सभी नगर विकास योजनाओं को जनहित में वापस ले लिया गया है। शासन ने आदेश को राजपत्र (गजट) में प्रकाशित भी कर दिया है। यह निर्णय भारतीय किसान संघ के 26 दिसंबर से उज्जैन में ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ आंदोलन की चेतावनी के बाद लिया गया है। किसान संघ ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक लैंड पूलिंग नीति को पूरी तरह निरस्त करने का लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। आंदोलन की घोषणा के बाद सरकार और किसान संगठनों के बीच टकराव की स्थिति लगातार गहराती जा रही थी। दरअसल, सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 की तैयारियों के तहत उज्जैन क्षेत्र में दीर्घकालिक विकास योजनाओं के अंतर्गत किसानों की भूमि को लैंड पूलिंग के माध्यम से विकसित करने का प्रस्ताव था।




