बालाघाट: तीन दशकों तक जंगलों में दहशत फैलाने वाले माओवादी संगठन का जिले से पूर्ण सफाया हो गया है। गुरुवार को जिले में सक्रिय बचे हुए दो हार्डकोर माओवादी दीपक उर्फ सुधाकर उर्फ मंगल उइके और उसके साथी रोहित (एसीएम, दर्रेकसा एरिया कमेटी) ने कोरका स्थित सीआरपीएफ कैंप में आत्मसमर्पण कर दिया। एसपी आदित्य मिश्रा के मुताबिक इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद जिले में कोई हार्डकोर नक्सली नहीं रह गया है। वर्ष 1995 में संगठन से जुड़े दीपक उर्फ मंगल उइके ने लंबे समय तक मलाजखंड दलम के डिप्टी कमांडर और डीवीसीएम टैंक ग्रुप के सक्रिय माओवादी के रूप में काम किया। सूत्रों के मुताबिक दीपक संगठन की रणनीति, नए सदस्यों की भर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क तैयार करने में लीड रोल निभाता था। उसने आत्मसमर्पण के दौरान एक स्टेनगन भी जमा करवाई है। दीपक बालाघाट जिले के ही पालगोंदी गांव का रहने वाला है और स्थानीय इलाकों से अच्छी तरह वाकिफ होने के कारण सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार चुनौती बना हुआ था। दीपक पर 29 लाख रुपये का इनाम था, जबकि रोहित पर 14 लाख रुपये का इनाम था। अधिकारी ने बताया कि दोनों ही मुख्यधारा में लौटने के इच्छुक हैं।पिछले एक साल से पुलिस और सुरक्षाबलों ने जिले में गहन सर्चिंग, ड्रोन सर्विलांस, सप्लाई लाइन तोडऩे और गांवों में लगातार संवाद अभियान जैसे कदम उठाए थे।




