नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय और मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दलों से कहा है कि 30 दिनों के अंदर सभी संशोधनों के साथ अपने-अपने संविधान का अपडेटेड वर्जन उसके पास जमा करें। चुनाव आयोग ने यह निर्देश ऐसे समय में दिया है, जब सुप्रीम कोर्ट उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें राजनीतिक दलों के रजिस्ट्रेशन से लेकर उसके संचालन तक को लेकर वैधानिक नियावली बनाने की मांग की गई है, ताकि इसमें पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। राजनीतिक दलों को भेजी चिट्ठी में चुनाव आयोग ने कहा है कि जब जनप्रतिनिधित्व कानून, 1951 की धारा 29ए के तहत एक राजनीतिक दल का रजिस्ट्रेशन होता है, तब उनकी ओर से रूल्स और रेगुलेशन को लेकर मेमोरेंडम भी जमा किया जाता है। चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि राजनीतिक दल का संविधान इन दस्तावेजों का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें समय-समय पर पार्टी की ओर से अपनाई जाने वाली अंदरूनी प्रक्रिया जरूर दिखनी चाहिए। आयोग ने राजनीतिक दलों को लिखा है.. पार्टी का संविधान एक आवश्यक दस्तावेज होता है, जिसमें पार्टी का उद्देश्य और उसमें लोकतांत्रिक तरीके से काम करने के लिए जरूरी प्रक्रिया के बारे में आवश्यक जानकारी शामिल होती है। इसलिए यह जानकारी पार्टी के सभी सदस्यों तक भी पहुंचना जरूरी है, जिससे वे इसका पालन कर सकें और आम जनता भी इससे अवगत रहे। चुनाव आयोग ने पॉलिटिकल पार्टियों से कहा है कि पिछली बार जब उन्होंने दस्तावेज सौंपा था, उसके बाद से उसमें जितने भी बदलाव हुए हैं, उन सबकी कॉपी भी साथ ही जमा करें। इन अपडेटेड कॉपी से पार्टी के अंदर वैधानिक जरूरतों के पालन होते रहने की पुष्टि होती है और यह सुनिश्चित हो जाता है कि जनता को यह पता रहे कि पार्टी किन नियमों के तहत संचालित हो रही है।




