लोगों को वोटर लिस्ट से नाम हटने का डर, बोले- हम कम पढ़े-लिखे, फॉर्म का पता नहीं, एसआईआर से संकट में प्रवासी

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नई दिल्ली/भोपाल/रायपुर/जयपुर: देश के 12 राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण चल रहा है। लेकिन चुनाव आयोग ने एसआईआर के लिए जो प्रावधान कर रखा है उसने राजनीतिक पार्टियों, बीएलओ और मतदाताओं को परेशानी में डाल दिया है। खासकर नौकरी, कारोबार, मजदूरी के लिए दूसरे राज्यों में रह रहे प्रवासियों को सबसे अधिक डर सता रहा है। अधिकांश लोगों का कहना है कि उनके गांव से फोन आ रहा है कि जल्दी से फॉर्म भरने आ जाओ, नहीं तो वोटर लिस्ट से नाम कट जाएगा…यहां वोटर लिस्ट अपडेट हो रही है। लाखों प्रवासी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के दौरान असमंजस के दौर से गुजर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर राजनीति गरमा गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने दावा किया है कि प्रदेश के 80 मतदान केंद्रों में 100 प्रतिशत मतदाता फॉर्म का डिजिटाइजेशन पूरा हो चुका है। लेकिन आयोग के इस दावे पर अब पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि एसआईआर के मामले में लक्षद्वीप (88.20 प्रतिशत), गोवा (69.38 प्रतिशत), और राजस्थान (65.52 प्रतिशत) से हुआ है। पांच करोड़ से अधिक मतदाताओं वाले राज्यों में, मध्य प्रदेश केवल राजस्थान से पीछे है, जिससे यह प्रभावी रूप से दूसरी स्थिति में है। 4 दिसंबर तक सभी को फॉर्म भरकर जमा करवाना है, ताकि वोटर लिस्ट से नाम नहीं कटे। लेकिन कई प्रवासियों को इस प्रक्रिया की जानकारी तक नहीं है।

मप्र 57 प्रतिशत डिजिटाइजेशन:
मध्य प्रदेश में चुनावी मतदाता सूची के डिजिटलीकरण का काम 57.05 प्रतिशत पूरा हो गया है, जिससे यह इस काम में लगे 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चौथे स्थान पर आ गया है। यह प्रगति ऐसे समय में हुई है जब ड्यूटी पर तैनात बूथ-लेवल ऑफिसर्स की मौतें चिंता का विषय बन गई हैं। 11 नवंबर से अब तक कम से कम चार बीएलओ की मौत हो चुकी है, जिनमें से सभी सरकारी स्कूल शिक्षक थे। उनके रिश्तेदारों का आरोप है कि काम का अत्यधिक दबाव, लंबे काम के घंटे और लक्ष्य पूरा न करने पर निलंबन का डर इन मौतों का कारण बना है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 5.73 करोड़ मतदाताओं को 65014 बीएलओ द्वारा मतदाता सूची में नाम जोडऩे के लिए फॉर्म दिए गए हैं। 23 नवंबर तक इनमें से 3.27 करोड़ फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके थे। इस बीच, बीएलओ की मौतें चिंता बढ़ा रही हैं।