भोपाल: स्कूलों में बच्चों को अत्याधुनिक टच डिस्प्ले वाले और व्हाइटबोर्ड, कंप्यूटर, प्रोजेक्टर की जगह अब इंटरेक्टिव पैनल बोर्ड से पढ़ाने की तैयारी है। सभी सांदीपनि और पीएम-श्री समेत अन्य हायर सेकंडरी स्कूलों में ऐसे 10149 पैनल लगाए जाने हैं। लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इस पूरी योजना के नाम पर इंटरेक्टिव पैनल दोगुने रेट पर खरीदने की कोशिश हो रही है। पहले भी नियम शर्तों में ऐसे क्लॉज़ डाले जिससे प्रतिस्पर्धा समाप्त होकर पूर्व में चयनित कंपनियों को ही लाभ मिले। एक बार फिर इस टेंडर में बिचौलियों ने शासन को चूना लगाने की तैयारी पूरी कर ली है। यदि अपनी मंशा में कामयाब हुए तो लगभग 50 करोड़ का बंदरबांट होना तय है। दरअसल, 30/10/2025 को जेम पोर्टल पर निविदा GEM/2025/B/6837213 अपलोड की गई है। जिसमे 10149 इंटरेक्टिव पैनल खरीदे जाने है। इन पैनल का साइज 65 इंच है और इसके समान मॉडल और साइज के टॉप ब्रांडेड कंपनी के पैनल भारत सरकार के जैम पोर्टल पर महज 65 से 85 हजार रुपए तक में उपलब्ध हैं लेकिन संचालक पब्लिक इंस्ट्रक्शन, जिसे डीपीआई भी कहा जाता है उसके अधिकारियों ने ऐसे शर्तों को जोड़ा है, जिससे साफ पता चल रहा है कि किसी कंपनी विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए खेल खेला जा रहा है। जो इंटरेक्टिव पैनल 65 से 85 हजार में उसी कंफीग्रेशन में उपलब्ध है उसके लिए प्रति नग 40 हजार रुपए का फटका लगाने की तैयारी है। जिस एलजी और सैमसंग ब्रांड को उपकृत करने की कोशिश हो रही है उनके मुकाबले वही कॉन्फिगरेशन के इंटरेक्टिव पैनल के मॉडल नंबर ALTOS 1765A का मिलान किया तो दोनों ही समान निकले। लेकिन इनकी कीमत में लगभग दोगुना अंतर है। इसके पहले भी स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी ऐसे ही निविदा में लोकायुक्त के सामने पेश हो चुके हैं। 2023 में भी एमपी बोर्ड को तीन गुना दाम पर कंप्यूटर बेचे थे। इससे सरकार को 55 करोड़ का नुकसान हुआ था। उसकी भी लोकायुक्त में शिकायत हुई थी, लेकिन बिना जांच के ही केस बंद कर दिया गया।
पहले भी हो चुकी है मनमानी:
अधिकारियों की मनमर्जी समझिए कि इसके पूर्व ऐसे ही एक खरीदी में हरदा जिले में एलजी कंपनी ने इंटरेक्टिव पैनल का रेट 90 हजार रुपए भर दिया था तो उसे डिसक्वालीफाई कर दिया गया। जबकि उसी ब्रांड की जैम पर 95 हजार रुपए कीमत है। बाद में रेट बढ़ाए तो इसी कंपनी को खरगोन और सीहोर जिले में ऑर्डर दे दिया रायसेन जिले के डीईओ ने इसी कंपनी को लिखा हमें ऊपर से ब्लैकलिस्ट करने को कहा गया था।




