भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में जगदीशपुर में कैबिनेट बैठक हुई। भोपाल से मुख्यमंत्री समेत पूरी कैबिनेट और अधिकारी ई-बस से जगदीशपुर पहुंचे। सीएम मोहन यादव ने कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रिटायर्ड न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई समिति के मसौदे को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस कानून का समर्थन करने की अपील भी की। मुख्यमंत्री ने बताया कि 27 अप्रैल 2026 को गठित सात सदस्यीय समिति ने विभिन्न राज्यों के यूसीसी मॉडल, प्रचलित कानूनों और सामाजिक पहलुओं का अध्ययन किया। सुझाव लेने के लिए वेब पोर्टल बनाया गया, जिसे 22 मई 2026 को सार्वजनिक किया गया। इसके अलावा प्रदेशभर में जिला और राज्य स्तर पर 50 से अधिक जन-परामर्श बैठकें आयोजित की गईं। सरकार के अनुसार पोर्टल पर 9,58,675 सुझाव प्राप्त हुए, जबकि बैठकों के माध्यम से भी 1,134 से अधिक सुझाव मिले। करीब 3.5 करोड़ एसएमएस भेजकर लोगों से राय ली गई। सरकार का दावा है कि प्राप्त सुझावों में 93.54 प्रतिशत लोगों ने मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने का समर्थन किया। वहीं 92.20 प्रतिशत लोगों ने सभी समुदायों में महिलाओं और पुरुषों के लिए समान कानून की वकालत की। 91.32 प्रतिशत लोगों ने भेदभावपूर्ण तलाक संबंधी प्रावधान समाप्त करने का समर्थन किया, जबकि 92.66 प्रतिशत लोगों ने महिलाओं और पुरुषों को संपत्ति में समान अधिकार दिए जाने की बात कही। बेटे और बेटियों को संपत्ति के उत्तराधिकार में समान अधिकार दिए गए हैं। उनकी वैवाहिक स्थिति कुछ भी हो। मृतक की संपत्ति में विधवाओं और विधुरों के साथ भी समान व्यवहार होगा।
बहुविवाह पर रोक, हर विवाह का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य:
समान नागरिक संहिता में सभी समुदायों में केवल एक ही शादी (मोनोगैमी) को अनिवार्य बनाता है। कोई भी व्यक्ति एक समय में केवल एक ही जीवित जीवनसाथी के साथ शादीशुदा रह सकता है। विवाह के लिए पुरुषों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं की 18 वर्ष तय की गई है। अमान्य सहमति और प्रतिबंधित रिश्तों (जब तक परंपरा की अनुमति न हो) के बीच विवाह पर रोक लगाई गई है। मौखिक तलाक या अनौपचारिक पंचायत के फैसलों को पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित किया गया है। अब विवाह का समापन केवल कानून में बताए गए स्पष्ट और वैधानिक आधारों पर ही हो सकता है।
निकाह हलाला जैसी शर्तों को बढ़ावा देना अपराध:
मौजूदा व्यवस्था के विपरीत, अब महिलाओं को भी यह अधिकार दिया गया है कि यदि उनके पति ने शादी के समय किसी दूसरी महिला को गर्भवती किया है, तो पत्नी शादी को रद्द घोषित करने की मांग कर सकती है।साथ ही संहिता में लोगों के लिए शादी और तलाक दोनों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। शहरी क्षेत्रों में रूक्क ई-नगर पालिका पोर्टल और ग्रामीण क्षेत्रों में स्ष्ठरू, नगरपालिका या पंचायत के जरिए यह प्रक्रिया पूरी होगी। रजिस्ट्रेशन न होने से शादी अमान्य नहीं होगी, लेकिन रजिस्ट्रार द्वारा बिना ठोस लिखित कारण के आवेदन खारिज करने पर जुर्माने का प्रावधान है। तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से दोबारा शादी करने के लिए निकाह हलाला जैसी अपमानजनक या नीचा दिखाने वाली शर्तों को मानना, बढ़ावा देना या मजबूर करना एक दंडनीय आपराधिक अपराध माना जाएगा।
अवैध शब्द को पूरी तरह हटाया:
बच्चों के अधिकार और कस्टडी को लेकर संहिता में अवैध संतान की अवधारणा समाप्त कर दी गई है। विवाह, लिव-इन, गोद लेने, सरोगेसी या असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा मिलेगा। अभिरक्षा के मामलों में अदालत बच्चे के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देगी।




