सुप्रीम कोर्ट कैंसर की महंगी दवाओं पर सख्त, केंद्र से मांगा जवाब

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नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): कैंसर की जीवनरक्षक दवाओं की अत्यधिक कीमतों और इलाज के इंतजार में हुई मरीज की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख दिखाया है। शीर्ष अदालत ने मामले पर स्वतः संज्ञान लेकर कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन सभी लोगों से जुड़ा है जो महंगी दवाओं का खर्च वहन नहीं कर सकते। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की बेंच ने स्पष्ट किया कि जहां केरल हाईकोर्ट अपने समक्ष लंबित संबंधित याचिका पर फैसला करेगा, वहीं सुप्रीम कोर्ट जीवनरक्षक दवाओं की कीमत और उनकी उपलब्धता के व्यापक मुद्दे पर सुनवाई करेगा। यह कार्रवाई वर्किंग ग्रुप ऑन एक्सेस टू मेडिसीन्स एंड ट्रीटमेंट के संयोजकों के प्रतिनिधित्व पर आधारित है। कोर्ट ने मेटास्टैटिक ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित एक महिला की याचिका पर केरल हाईकोर्ट में हुई देरी पर भी नाराजगी जाहिर की, जिसने रिबोसिक्लिब दवा के लिए 2022 में अदालत का रुख किया था। केंद्र ने धारा 100 का उपयोग करने से इंकार कर कहा था कि मौजूदा परिस्थितियां राष्ट्रीय आपातकाल जैसी नहीं हैं।