जबलपुर (मध्य स्वर्णिम): कांग्रेस आईटी सेल के तीन कार्यकर्ताओं को राजस्थान पुलिस द्वारा भोपाल साइबर क्राइम सेल के सहयोग से हिरासत में लेने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है । अदालत ने गिरफ्तारी की पूरी प्रक्रिया को अवैध हिरासत माना है। हाईकोर्ट ने भोपाल पुलिस को पीड़ितों के बयान के आधार पर दर्ज एफआईआर की विधिवत जांच करने और राजस्थान पुलिस के संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच तार्किक निष्कर्ष तक जारी रखने के निर्देश दिए हैं | कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर करने का उद्देश्य काफी हद तक पूरा हो चुका है। इसी आधार पर अदालत ने याचिकाओं का निराकरण करते हुए जांच संबंधी जरूरी निर्देश जारी किए यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के नाम से वायरल हुए कथित फर्जी पत्र से जुड़ा है। इस मामले में राजस्थान पुलिस ने मध्य प्रदेश पुलिस के सहयोग से कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े खिजर खान सहित तीन युवकों को हिरासत में लिया था। तीनों की ओर से हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर आरोप लगाया गया कि उन्हें 19 अप्रैल की रात से 20 अप्रैल की रात और अगले दिन दोपहर तक भोपाल साइबर क्राइम थाने में अवैध रूप से रखा गया । इस दौरान उन्हें किसी भी मजिस्ट्रेट के सामने पेश नहीं किया गया ।




