उनको ये शिकायत है कि…

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प्रसंगवश (मध्य स्वर्णिम): सुनील दत्त तिवारी (मो. 9713289999)
कहने को बहुत कुछ था अगर कहने पे आते । दुनिया की इनायत है कि हम कुछ नहीं कहते ।।
राजेंद्र कृष्ण जी के द्वारा लिखित इस गीत को लता जी ने अपने कर्णप्रिय आवाज में गाया तो शिकायत भी मनुहार में बदल गया। लेकिन, इन दिनों मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी पर चल रही महादशा की वजह से उनकी मनुहार भी शिकायत में बदल रही है। मीनाक्षी नटराजन के राज्य सभा चुनाव में औंधे गिरने के बाद संभलने की लाख कोशिशों के बावजूद पटवारी बार बार फिसल रहे हैं नटराजन का नामांकन निरस्त तकनीकी त्रुटियों की वजह से हुआ था लेकिन, डमी प्रत्याशी नहीं खड़ा करने के पीछे क्या अड़चन थी ? पटवारी आज तक नहीं बता पाए ।फिर उनकी शिकायत रहती है कि मीडिया कांग्रेस को पर्याप्त हाइट नहीं दे रहा है। पिछले दिनों राष्ट्रीय स्तर के एक समाचार पत्र (मध्य स्वर्णिम नहीं) ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और उनके परिजनों के नाम कथित बेनामी संपत्ति को लेकर एक सनसनीखेज रिपोर्ट प्रकाशित करने का दावा किया। जीतू एंड कंपनी को लगा जैसे बैठे बैठाए तख्ता पलट का कोई ब्रम्हास्त्र हाथ लग गया। आनन फानन में उसी दोपहर बड़ी पत्रकार वार्ता बुलाई, लेकिन समाचार पत्र के रिपोर्ट के इतर और कोई अतिरिक्त इनपुट नहीं दे सके। दूसरे दिन दिल्ली पहुंच गए जहां उन्होंने आरोपों का एक बड़ा बम फोड़ा – एक रुपए में 500 करोड़ की संपत्ति मुख्यमंत्री को मिल गई । आरोप बहुत बड़े थे ऐसा पटवारी जी मानना था, इस पर दिनभर टीवी डिबेट होनी थी, अखबारों में पूरे पेज की रिपोटिंग होनी थी जो प्रदेश अध्यक्ष पिछले ढाई महीने से अपने प्रवक्ताओं की आधिकारिक फेहरिस्त जारी नहीं पाया वो अब मीडिया को क्या और कैसे चलाना है? बेबसी और मजबूरी समझ में आ रही है आपकी जीतू भाई । फिर आपके ही पितातुल्य राजनैतिक गुरु दिग्विजय सिंह ने तो उज्जैन में जाकर, दस्तावेज के साथ बताया कि आपके 500 करोड़ वाले आरोप में सच्चाई नहीं है। आज भी वो प्रॉपर्टी सरकारी ही है। फिर आप कैसे मीडिया जगत पर अपनी शिकायतों की गठरी लाद सकते हैं? आप चाहते हैं कि आप के हर अप्रासंगिक आरोपों पर सनसनी मचाई जाए? राम मंदिर चढ़ावा मामले से लेकर हर उस मामले को मीडिया ही प्रकाशित कर रहा है जिस पर आप बयानवीर बन जाते हैं | चैनलों में डिबेट के लिए अपने प्रतिनिधियों को नहीं भेजने का आपका फैसला व्यक्तिगत लगता है, पार्टी का नहीं क्योंकि जैसा कि मैने ऊपर ही लिखा है ढाई महीने पहले प्रवक्ताओं की टीम भंग होने बाद नियुक्तियां अभी तक नहीं हुई, तो ये आपकी विफलता है और शायद आप को इसका ज्ञान हुआ तो भूल सुधार की कोशिश की गई है | मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इन दिनों आत्म मुग्धता की अनचाहे दौर से गुजर रहे हैं। शायद यह भी गुमान न हो गया हो कि जो जीतू पटवारी बोल रहे हैं वही सच है ! हालांकि यह भी सही है कि जीतू की चलती गाड़ी को पंचर करने वाले कांग्रेस में भी बहुतेरे हैं। लिहाजा पटवारी जी को चाहिए कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस की जमीन को बचाने के लिए संघर्ष करें, मीडिया तो अपनी राह चल ही रहा है। कुछ सलाह अपने वरिष्ठों से लीजिये, कुछ अपने कनिष्ठों से लीजिये। लेकिन अंधेरे को चीरती हुई सनसनी मत बनिए। डेढ़ साल कमलनाथ जी की सरकार भी रही है, जनसंपर्क को एक आपकी वरिष्ठ नेत्री ने कैसे कैप्चर किया था? किसी से छिपा नहीं है। तुलसी टॉवर से विभाग को संचालित करने का ही नतीजा था कि माध्यम द्वारा जारी विज्ञापन में कमलनाथ को तीन हाथों के अलौकिक स्वरुप में दिखाया गया था। खैर, विषय इतना है की आपको प्रदेश की मीडिया से बहुत साड़ी शिकायतें हैं, विपक्ष में होने के नाते होना भी चाहिए जायज है । इसीलिए पटवारी जी शायद खुर्शीद तलब ने ये लाइन आप के लिए ही लिखी लगती हैं- कोई चिराग जलता नहीं सलीके से, मगर सभी को शिकायत हवा से होती है।।