भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मध्य प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर कार्रवाई तेज हो गई है। अनुसूचित जाति विकास विभाग की राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने उन्हें नोटिस जारी कर 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। समिति ने मंत्री से उनके जाति प्रमाण पत्र से संबंधित सभी मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। जानकारी के अनुसार, यह मामला जाति प्रमाण पत्र की वैधता की जांच से जुड़ा है। इससे पहले इस संबंध में न्यायालय में भी मामला पहुंच चुका है । न्यायालय की कार्यवाही के बाद राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए मंत्री को नोटिस जारी किया है । यह मामला कांग्रेस नेता और एससी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार की ओर से दायर याचिका के बाद सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रतिमा बागरी ने अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र प्राप्त कर आरक्षण का लाभ लिया और उसी आधार पर सतना जिले की रैगांव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा तथा निर्वाचित होने के बाद मंत्री बनीं । याचिकाकर्ता का दावा है कि संबंधित क्षेत्र में बागरी जाति अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं है। अपने दावे के समर्थन में उन्होंने वर्ष 1961 और 1971 की जातिगत जनगणना, 2003 में राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के निर्णय तथा 2007 के केंद्र सरकार के राजपत्र सहित अन्य दस्तावेजों का हवाला दिया है ।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई जांच:
प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र की जांच की प्रक्रिया मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई है। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य स्तरीय अनुसूचित जाति छानबीन समिति को निर्देश दिए थे कि वह संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच पूरी करे और यह तय करे कि जारी किया गया अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र वैध है या नहीं। न्यायालय ने यह भी कहा था कि जांच पूरी होने के बाद समिति नियमानुसार अपना अंतिम निर्णय पारित करेगी।




