सुप्रीम कोर्ट में एथेनॉल पर सुप्रीम विवाद

0

नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): देश में जब से सरकार ने एथेनॉल मिले हुए पेट्रोल सप्लाई शुरु करने का फैसला लिया तभी से आम जनता के मन में अपने वाहनों को लेकर तमाम तरह की आशंकाएं भी आई हैं। सबसे बड़ा डर कि क्या ई 20 पेट्रोल हमारी कार को कर देगा बेकार ? इन आशंकाओं के बीच आज सुप्रीम कोर्ट में एक मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल, ई 20 मिश्रण की नीति का प्रभाव अभी परीक्षण के दौर में है और इसके परिणाम अगले वर्ष तक साफ होंगे। सरकार ने यह भी बताया कि ई 20 नीति वापस लेने का कोई प्रस्ताव नहीं है, क्योंकि यह राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति का हिस्सा है। मामले की शुरुआत विन्प डिस्टिलरीज एंड शुगर प्राइवेट लिमिटेड कपनी की याचिका से जुड़ा है। कंपनी ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका लगाते हुए दलील दी थी कि वह एथेनॉल बनाती है। सरकार की ओर से उसे केवल 3.92 करोड़ लीटर का आवंटन किया गया है जबकि उसने 9.26 करोड़ लीटर की बोली लगाई थी। मामले में सरकार की ओर से कहा गया कि किसी भी कंपनी को पहले ज्यादा आवंटन मिला तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि कंपनी को हर बार उतनी ही मिलेगा। कर्नाटक हाईकोर्ट ने सरकार को अपने आवदेन पर फिर से विचार करने को कहा था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सरकार की ओर से यह भी आशंका जतायी गई कि अलग-अलग हाईकोर्ट में इस मुद्दे से जुड़ी कई याचिकाएं लंबित हैं, जिससे राष्ट्रीय नीति प्रभावित हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार की आशंकाएं:
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि ई 20 ब्लेंडिंग प्रोग्राम अभी प्रायोगिक फेज में है। इसके अच्छे बुरे नतीजे अगले साल तक सामने आएंगे। अभी यह कहना कि इससे वाहन खराब होने की धारणाएं निर्मूल हैं। फिलहाल ई 20 नीति में बदलाव की कोई योजना नहीं है। एथेनॉल का आवंटन मांग और उपलब्धता के आधार पर घट-बढ़ सकता है। मौजूदा सप्लाई नीति जारी रहेगी।अगर कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार किसी एक सप्लायर का कोटा बढ़ाते, तो वैसे में कानूनी विवादों का सिलसिला शुरू हो जाता और फिर सप्लाई चेन ध्वस्त हो जाती।