भोपाल: मानसून का इंतजार अब अंतिम चरण में दिखाई दे रहा है। आईएमडी के अनुसार सोमवार को प्रदेश का वातावरण तेजी से मानसूनी स्वरूप ग्रहण कर रहा है। रात के तापमान में गिरावट, हवा में बढ़ती नमी और अधिकांश क्षेत्रों में हो रही बारिश संकेत है कि मानसून के आगमन के लिए परिस्थितियां अनुकूल बन रही हैं। प्रदेश के अधिकांश जिलों में न्यूनतम तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया। भोपाल में न्यूनतम तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से लगभग 5 डिग्री कम है। राजगढ़, दमोह, शिवपुरी और ग्वालियर जैसे जिलों में भी रात का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री नीचे दर्ज हुआ । यह स्थिति बताती है कि बादलों और नमी की उपस्थिति के कारण वातावरण में शीतलता बनी हुई है। पिछले 24 घंटों में शिवपुरी में 20.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो प्रदेश में सर्वाधिक रही। इसके अलावा मालांजखंड, ग्वालियर, जबलपुर और गुना भी बारिश रिकॉर्ड की गई । वर्षा अभी पूरे प्रदेश में एक समान नहीं हुई है, लेकिन यह स्पष्ट संकेत है कि वातावरण में पर्याप्त नमी और अस्थिरता मौजूद है। मौसम विभाग के अनुसार 16 से 20 जून के बीच भोपाल, विदिशा, रायसेन, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, जबलपुर, डिंडोरी, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, सागर और आसपास के जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।
राजधानी में हर 3 मिनट में बिजली गुल:
मध्य प्रदेश की बिजली कंपनी लगातार कई रिकॉर्ड बना रही हैं। इस साल ही कई बार पीक आवर्स में अधिकतम विद्युत् की सप्लाई का रिकॉर्ड हो या फिर लगातार बिना ब्रेक विद्युत् संयंत्र सञ्चालन का कारनामा भी इसी विभाग ने कर दिखाया है। लेकिन, इस सभी के बावजूद इस बार एक ऐसा रिकॉर्ड अनचाहे की बन गया है कि शायद ही कंपनी के कर्ताधर्ता इसे याद रखना चाहेंगे एक रिपोर्ट के मुताबिक बिजली कटौती से बेहाल राजधानी वासियों को इस साल मई के भीषण गर्मी वाले महीने में रिकॉर्ड तोड़ पावर कट का सामना करना पड़ा। डिस्कॉम की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार, अकेले मई महीने में शहर में कुल 14,974 बार बिजली गुल हुई। इसका औसत निकाला जाए तो शहर में हर तीन मिनट में एक बार बिजली कटौती दर्ज की गई । रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, कुल कटौतियों में से 6,896 बिजली कट ऐसे थे जो 5 मिनट से ज्यादा समय तक खिंचे। यानी करीब हर साढ़े छह मिनट में शहर के किसी न किसी हिस्से में लंबी बिजली कटौती हुई। हालांकि, मई 2025 (18,767 पावर कट ) की तुलना में इस बार का आंकड़ा थोड़ा कम है, लेकिन पिछले साल मई में भारी बारिश और तूफान थे। इस साल बिना किसी बड़े मौसम बदलाव के इतनी बड़ी संख्या में ट्रिपिंग होना डिस्कॉम के मेंटेनेंस पर गंभीर सवाल खड़े करता है | हैरानी की बात यह है कि जहां आम जनता वोल्टेज के उतार-चढ़ाव और कटौती से जूझ रही थी, वहीं शहर के 514 फीडर में से 36 फीडर ऐसे थे जहां एक बार भी ट्रिपिंग नहीं हुई। इनमें राज्य सचिवालय, भोपाल कलेक्टरेट और कुछ प्रीमियम आवासीय इलाके शामिल हैं। दूसरी ओर, डिस्कॉम के अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भोपाल की भौगोलिक स्थिति और हरियाली के कारण पेड़ की शाखाएं ओवरहेड लाइनों पर गिर जाती हैं, जिससे यह ट्रिपिंग होती है ।




