सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर की स्थापना होगी

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भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आज की सबसे मूल्यवान संपत्ति डेटा है। डिजिटल सुरक्षा समय की मांग है। डेटा की सुरक्षा, राष्ट्र की सीमा की सुरक्षा जितनी महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में न केवल देश अपितु पूरी दुनिया में सायबर तकनीक और उससे जुड़ी चुनौतियों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। हर दिन इसके नए आयाम सामने आ रहे हैं । अपराध के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं । ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी आधुनिक तकनीक और द्रोण जैसे साधनों के उपयोग से सुरक्षा चुनौतियों का नया स्वरूप देखने को मिला । प्रधानमंत्री मोदी का देश की सुरक्षा को हर तरह से सशक्त बनाने के लिए अभिनंदन है। प्रधानमंत्री मोदी की विशेषता है कि वह समय से पहले आने वाले वाली चुनौतियों को पहचान लेते हैं और शासन-प्रशासन और जन सामान्य को उसके प्रति जागरूक करने के लिए तत्काल आवश्यक कदम भी उठाते हैं । प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर सायबर अपराध, डीप फेक और अन्य चुनौतियों पर केंद्रित कार्यशाला में सायबर सुरक्षा संस्कृति को सशक्त बनाने में सभी मार्ग खोजे जाएंगे । मुख्यमंत्री डॉ. यादव राज्य डेटा के लिए सायबर सुरक्षा फ्रेमवर्क को सुदृढ़ बनाने पर सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में कार्यशाला के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया । कार्यशाला का उद्देश्य राज्य शासन के विभिन्न विभागों में सायबर सुरक्षा से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों, उभरते सायबर खतरों, डेटा संरक्षण की आवश्यकताओं और डिजिटल शासन प्रणालियों की सुरक्षा पर व्यापक विचार- विमर्श करना है | मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सायबर अपराध और डेटा सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए राज्य में सायबर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर स्थापित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि महू स्थित मिलिट्री कॉलेज ऑफ टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से यह रिसर्च सेंटर स्थापित किया जाएगा । सेंटर केंद्रीय सायबर सुरक्षा, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के लिये महत्वपूर्ण आधार बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सायबर अटैक की समय पर पहचान और निगरानी में आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था से लैस सेंटर की महती भूमिका होगी । यह व्यवस्था केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्वानुमान आधारित निरंतर सतर्कता की दिशा में ठोस कदम साबित होगी ।

प्रदेश में होंगे 44 सायबर कमांडो:

प्रदेश में सायबर सुरक्षा क्षमता को बढ़ाने के लिए वर्तमान में 6 सायबर कमांडो कार्यरत हैं और 38 अन्य का चयन किया जा चुका है । राज्य सायबर सेल में सिंहस्थ- 2028 से पहले 44 सायबर कमांडो तैयार कर लिए जाएंगे । सिंहस्थ में सायबर अटैक पर बारीकी से नजर रखने और उसे समय रहते प्रतिबंधित करने के लिए लगभग 3 हजार इंजीनियरिंग विद्यार्थियों एवं युवा स्वयं सेवकों को ‘सायबर वॉरियर’ के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना है। सायबर सुरक्षा के क्षेत्र में रोकथाम, जागरूकता और त्वरित प्रतिक्रिया ही सबसे प्रभावी उपाय हैं और राज्य नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया जा रहा है ।