ईरान-अमेरिका समझौते पर इस्राइल का ऐतराज

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नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): अमेरिका समर्थित अमेरिका- ईरान शांति समझौते को लेकर इस्राइल के भीतर विरोध के स्वर उभरने लगे हैं। इस्राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने समझौते को खारिज करते हुए कहा कि इस्राइल इस समझौते का पक्षकार नहीं है और वह इसे मानने के लिए बाध्य नहीं है । उन्होंने कहा कि इस्राइल एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है, न कि अमेरिका के अधीन कोई राष्ट्र | बेन-गवीर ने दावा किया कि यह समझौता इस्राइल की सुरक्षा चिंताओं को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं करता । उन्होंने यह भी कहा कि लेबनान में इस्राइली सैनिकों द्वारा कब्जे में लिए गए किसी भी क्षेत्र से पीछे नहीं हटना चाहिए। उनके बयान ने समझौते को लेकर इस्राइल के भीतर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते को लेकर इस्राइल में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। डेमोक्रेट्स पार्टी के प्रमुख यायर गोलन ने इस समझौते को इस्राइल के लिए खराब करार देते हुए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस्राइली वायुसेना और सैनिकों के साहस से हासिल सैन्य उपलब्धियां इस समझौते के कारण कमजोर पड़ गई हैं। गोलन ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू ने देश की रणनीतिक बढ़त गंवा दी और पूर्ण विजय का वादा करने के बावजूद इस्राइल को कमजोर बावजूद इस्राइल को कमजोर स्थिति में पहुंचा दिया। उन्होंने इसे वर्षों की नीतिगत विफलताओं का परिणाम बताया | अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम और शांति समझौते की घोषणा के बाद ईरानी सेना ने बड़ा दावा किया है। ईरान के सैन्य मुख्यालय ने जारी बयान में कहा कि उसने युद्ध के दौरान अमेरिका और इस्राइल को अपमानित किया और उन्हें हार स्वीकार करने पर मजबूर कर दिया। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित बयान में कहा गया कि ईरानी बलों ने अपनी सैन्य क्षमता और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करते हुए विरोधियों को पीछे हटने पर मजबूर किया । ईरानी सेना के अनुसार, दुश्मनों के पास पराजय और आत्मसमर्पण स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच संघर्ष समाप्त करने को लेकर समझौते की घोषणा की गई है।

टिकाऊ समझौते की उम्मीद: मोदी अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बनी सहमति का पीएम नरेंद्र मोदी ने स्वागत किया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से दुनिया भर में गंभीर आर्थिक दिक्कतें आई हैं और कई देशों में जानें गई हैं। उन्होंने कहा कि भारत को उम्मीद है कि इस सहमति को लागू करने से इस इलाके में शांति और स्थिरता वापस लाने में मदद मिलेगी और आवाजाही और व्यापार की आजादी पक्की होगी। हम बाकी मुद्दों पर बातचीत से एक टिकाऊ आखिरी समझौते पर पहुंचने की उम्मीद करते हैं। ईरान ने की समझौते की पुष्टि ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने अमेरिका के साथ शांति समझौते की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि तेहरान प्रस्तावित 60 दिन की वार्ता अवधि में अंतिम समझौते के लिए तभी प्रवेश करेगा, जब वह शत्रुता समाप्त करने, नाकाबंदी हटाने और ईरानी संपत्तियों को जारी करने संबंधी वॉशिंगटन की प्रतिबद्धताओं का सत्यापन कर लेगा।