नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): भारत सरकार अब रसोई गैस के पारंपरिक एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भरता कम करने और पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू कर रही है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक प्रेस रिलीज के अनुसार, सरकार का लक्ष्य उन क्षेत्रों में पीएनजी कनेक्शन का तेजी से विस्तार करना है जहां इसका बुनियादी ढांचा पहले से तैयार है | मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल द्वारा जारी पत्र के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्षेत्र में हालिया वैश्विक घटनाक्रमों के कारण एलपीजी पर निर्भरता कम करना जरूरी हो गया है। इसके अलावा, एलपीजी पर दी जा रही भारी सब्सिडी भी सरकार के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती बनी हुई है । रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि तेल विपणन कंपनियों को वर्तमान में प्रति एलपीजी सिलिंडर 690 रुपये का नुकसान हो रहा है। सालाना आधार पर यह घाटा 1,38,000 करोड़ रुपये तक पहुँच जाता है। इसके अतिरिक्त, सरकार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 300 रुपये प्रति सिलेंडर की अतिरिक्त सब्सिडी देती है, जिसका वार्षिक बोझ 19,000 करोड़ रुपये है।
नोटिस देने के निर्देश:
सरकार ने तेल कंपनियों और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन संस्थाओं को निर्देश दिया है कि वे निम्नलिखित मामलों में उपभोक्ताओं को नोटिस जारी करें। डबल कनेक्शन वाले उपभोक्ता: जिन लोगों के पास पीएनजी कनेक्शन है, लेकिन उन्होंने अभी तक अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर नहीं किया है। इससे एलपीजी की कालाबाजारी और अनावश्यक उपयोग को रोका जा सकेगा। ऐसे लोग जो उन इलाकों में रहते हैं जहाँ पीएनजी पाइपलाइन बिछ चुकी है, लेकिन उन्होंने अभी तक स्विच नहीं किया है।इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला कलेक्टरों, जिला मजिस्ट्रेटों और नगर निकायों के अधिकारियों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है।




