त्वरित टिप्पणी (मध्य स्वर्णिम): सुनील दत्त तिवारी (मो. 9713289999)
एक बड़ी पुरानी कहावत है-चूड़ियों का बोझ तो कलाइयां सह न सकीं, कहते हैं कि तलवार हम उठाएंगे। आज यही हश्र मप्र कांग्रेस का राज्य सभा चुनाव के दौरान हुआ ।ग़ालिब उम्र भर गलती करता रहा, धूल चेहरे पर थी आईना साफ करता रहा।मध्य स्वर्णिम ने कल ही लिखा था कि डॉ. मोहन यादव और हेमंत खंडेलवाल के साथ पूरी बीजेपी राज्य सभा में तीसरे उम्मीदवार को लेकर बहुत संजीदा है। जिस तरह की हुंकार बीजेपी ने भरी थी, उससे तय था कि पार्टी अकारण ही ठहरे हुए पानी में कंकर नहीं फेंकने जा रही ।मगर सर्वाधिक हास्यास्पद तो कांग्रेस का विधवा विलाप है। मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी के बाद से ही कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश नहीं की । और तो और पूरी पार्टी ऑल इज वेल के मोड पर चली गई । कांग्रेस का विधवा विलाप इसलिए लिख रहा हूं कि नामांकन रद्द हो जाने के बाद जिस सुपर एक्टिव मोड में कांग्रेस के सभी दिग्गज आ गए हैं यदि उससे कम चिंता पहले करते हो तो शोकसभा की आवश्यकता ही नहीं पड़ती । पहले तो मीनाक्षी नटराजन से यह उम्मीद कतई नहीं कि जा सकती थी कि इतनी जानकार होने के बावजूद 2025 के उस मामले को जिसमे न्यायालय से बकायदा नोटिस जारी हुआ है, उसे छिपाएंगी।लोक प्रतिनिधित्व कानून के तहत अब तो हर उम्मीदवार के लिए आवश्यक है कि वो अपने मामलों की जानकारी अभ्यर्थी फॉर्म से साथ सूचित करे, जो कि नटराजन ने नहीं किया। दूसरा विकल्प डम्मी प्रत्याशी का भी होता है। अक्सर ऐसे प्रतिष्ठापूर्ण चुनावों में राजनैतिक दल डम्मी उम्मीदवार खड़े करते ही हैं। मीनाक्षी और कांग्रेस दोनों ने ये एहतियात नहीं बरती जिसकी वजह से उम्मीदवारी रद्द हो गई। अब इसमें बीजेपी का क्या दोष ? लोकतंत्र की हत्या कैसे हुई? सरकार का दुरुप्रयोग कहां हुआ ? सूत्र बता रहे हैं कि नटराजन की उम्मीदवारी खुद राहुल गांधी ने तय की थी। दोनों वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं कमलनाथ और दिग्विजय सिंह से समर्थक विधायकों की लिस्ट लेकर यह ताकीद भी कर दिया था कि इन सभी की जिम्मेदारी संबंधितों की ही होगी। दूसरा पेंच यह था कि जीतू पटवारी डमी प्रत्याशी खड़ा कर पाने का साहस ही नहीं जुटा पाए। दूसरी तरफ बीजेपी ने केंद्रीय नेतृत्व को भरोसे में लेकर महेश केवट को केवल उम्मीदवार ही नहीं बनाया बार-बार मुख्यमंत्री और प्रदेश के बड़े नेता जीतने का भी दंभ भरते रहे बीजेपी को पता था सामने जो टीम है उसमें खेलने वाले कम, खेल बिगाड़ने वाले ज्यादा हैं। अब देश के सम्मानित वकीलों के जो कांग्रेस समर्थक हैं सोशल मीडिया पर बयान आ रहे हैं। जिन्हें देखकर अब वाकई अफसोस हो रहा है। क्या मीनाक्षी नटराजन को जानकारी देने से बीजेपी ने रोका था? क्या डमी प्रत्याशी खड़ा करने की मनाही बीजेपी ने की थ? यदि नहीं तो समझ जाइए आप राजनीति का ककहरा ही पढ़ रहे हैं। और अपनी गलतियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ना उचित भी नहीं है। अभी वक्त है आत्म अवलोकन का, यदि कांग्रेस कर ले तो शायद कुछ फतह कर पाएं अन्यथा – दिल ने की वो गलती जो समझ न आई तब, अब पछतावे की आग में जल रहा है सब ।
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