भोपाल (मध्य स्वर्णिम): मध्य प्रदेश में असुरक्षित और मिलावटी खाने के मामले कम जरूर नजर आ रहे हैं, लेकिन इसका कारण यह नहीं है कि खाद्य पदार्थों की शुद्धता बढ़ गई है। इसके पीछे असल वजह यह है कि विभाग द्वारा फूड सैंपलिंग का काम ही कम कर दिया गया है। मध्य प्रदेश खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन सालों में जहां एक तरफ मिलावट के नियमों का उल्लंघन करने वाले मामले घटे हैं, वहीं दूसरी तरफ सैंपलिंग में भी 11.1 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। सैंपलिंग और पकड़े जाने वाले मामलों के बीच का यह अंतर अब इस बात पर सवाल खड़े कर रहा है कि क्या खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक सख्ती कम हो गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में साल 2023-24 के दौरान कुल 13,998 खाद्य नमूनों की जांच की गई थी, जिनमें से 2,022 सैंपल मानक के अनुरूप नहीं पाए गए थे। इसके बाद साल 2024-25 में 13,920 सैंपल टेस्ट हुए और 1,635 सैंपल मिलावटी या सबस्टैंडर्ड निकले। वहीं, साल 2025-26 के शुरुआती और अनंतिम आंकड़ों में यह गिरावट और ज्यादा साफ दिखाई देती है, जिसमें 12,448 नमूनों की जांच हुई और केवल 757 सैंपल ही फेल घोषित किए गए। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि 2025-26 के ये आंकड़े अभी शुरुआती हैं और आगे की जांच व अदालती कार्यवाही के बाद इनमें बदलाव हो सकता है।




