नई दिल्ली (मध्य स्वर्णिम): 20 जुलाई को नीट पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान छात्रों पर गैरकानूनी पैलेट गन दागने की जांच चल रही है। सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) की एक टीम इस मामले की पड़ताल कर रही है और अगले हफ्ते तक जांच रिपोर्ट आ सकती है। जांच से जुड़े एक अधिकारी ने बताया है कि कनॉट प्लेस में प्रदर्शनकारियों पर जानलेवा बल का इस्तेमाल करने वाले रैपिड एक्शन फोर्स के एक जवान की पहचान कर ली गई है। सूत्रों के हवाले से बताया कि कनॉट प्लेस में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन दागने वाले आरएएफ के जवान की पहचान कर ली गई है। नाम न बताने की शर्त पर एक अफसर ने बताया, आरएएफ के जवान ने सात राउंड पैलेट गन दागे थे, जिनमें से पांच प्रदर्शनकारियों को लगे। दो गोलियां किसी को नहीं लगी। पैलेट गन की सभी फायरिंग कनॉट प्लेस में की गई थी। बता दें कि पैलेट गन और शॉक बैटन, सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स की दंगा-रोधी विंग, आरएएफ के साजो-सामान का हिस्सा हैं। सूत्रों ने बताया कि जांच टीम उन हालात का भी पता लगाएगी जिनमें पैलेट गन चलाई गईं और जिन जगहों पर इनका इस्तेमाल हुआ साथ ही, उस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पैलेट गन चलाने की इजाजत किसने दी:
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए ‘बर्बर हमले’ की जवाबदेही तय करने की मांग की थी। राहुल गांधी ने शाह से सवाल किया कि क्या उन्होंने छात्रों के खिलाफ ‘पैलेट गन’ समेत ‘घातक हथियारों’ के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। एक सरकारी अस्पताल ने पहले ही एक पीड़ित को पैलेट गन से चोट लगने की पुष्टि की थी, जिसके बाद विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यह जानना चाहा कि क्या सरकार ने पैलेट गन के इस्तेमाल को मंजूरी दी थी।




