दतिया उपचुनाव : अंतिम चरण में पहुंचा चुनावी रण

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दतिया (मध्य स्वर्णिम): विधानसभा उपचुनाव के रण का अंतिम चरण शबाब पर है। जीत के लिए दोनों ही पार्टियां एड़ी-चोटी का प्रयास कर रही हैं। दरअसल दतिया उपचुनाव भाजपा और कांग्रेस के बीच कम, बल्कि दोनों दलों के भीतर ज्यादा दिखाई दे रही है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान के लिए 28 की शाम 5 बजे प्रचार रुक जाएगा। ऐसे में मतदाताओं और कार्यकर्ताओं में अंतिम क्षण में जोश भरने की सारी कोशिशें चल रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी सोमवार के दिन एक बड़ा रोड शो किया। इस बीच बीजेपी की तरफ से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे दिग्गज प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के लिए जनता से भारी समर्थन की अपील कर रहे हैं। हालांकि, नरोत्तम चुनाव नहीं लड़ रहे, फिर भी पूरा चुनाव उन्हीं के इर्द-गिर्द घूम रहा है। भाजपा की हर बड़ी सभा में सीएम डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और प्रत्याशी आशुतोष तिवारी यह संदेश दे रहे हैं कि चुनाव नरोत्तम के मार्गदर्शन में लड़ा जा रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने नामांकन के दौरान नरोत्तम के भावुक होने की घटना को अलग तरीके से लिया है। पार्टी का मानना है कि टिकट कटने से नाराज समर्थकों का एक वर्ग भाजपा से दूरी बना सकता है। कांग्रेस में भी गुटबाजी खुलकर सामने आई है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती प्रचार से दूर हैं, जबकि अवधेश नायक के समर्थक नतीजों पर नजर गड़ाए हुए हैं। भारती ने पार्टी के प्रत्याशी घनश्याम सिंह के बयानों पर सवाल उठाए हैं, जो कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने वाले हैं। दतिया उपचुनाव का मुद्दा विकास से ज्यादा संगठन, समर्थकों की नाराजगी और भीतरघात बन गया है।

ऐसे समझें वोट गणित:
दतिया में कुल 2.20 लाख वोटर हैं, जिनमें सबसे बड़ा वोट बैंक करीब 40 हजार कुशवाह समाज का है। इसके बाद 34 हजार ब्राह्मण, 28 हजार अहिरवार और 17 हजार यादव वोटर हैं। भाजपा ने भारत कुशवाह और कांग्रेस ने सिद्धार्थ कुशवाह को चुनाव प्रभारी बनाया है। आजाद समाज पार्टी (आसपा) के प्रत्याशी दामोदर यादव भी समीकरण बदल रहे हैं, जिससे कांग्रेस चिंतित है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एससी वोटों में सेंध लगने का सबसे ज्यादा असर कांग्रेस पर पड़ेगा।